विधानसभा : रमन सिंह ने शराबबंदी, आउटसोर्सिंग और गन्ना किसानों के मामले में सरकार पर उठाए सवाल, कहा….

रायपुर। राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा हुई. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा केमिस्ट्री की भाषा में इस अभिभाषण को हम सरल शब्द में समझ सकते हैं. यह अभिभाषण पूरी तरह से गंध हीन और स्वादहीन है. पूरी तरह नीरस है. 36 मुद्दों पर सरकार ने घोषणा पत्र तैयार किया था. इनमें से किसी भी मुद्दे को पूरा करने की कोशिश तक नहीं की गई.

संविदा कर्मियों को नियमित करने की बात की थी कांग्रेस पार्टी ने, लेकिन यही सबसे बड़ा झूठ साबित हुआ. कल ही 6000 संविदा कर्मी रायपुर में धरना दे रहे थे. शराबबंदी भी सबसे बड़ा झूठ साबित हुआ. विधायकों से राय लिया जा रहा है. जनता से राय लिया जा रहा है. कमेटी बनाई जा रही है. पहले जो शराब दुकानों में बिकती थी वह कोचियों के माध्यम से बिक रहा है. गली-गली में बिक रहा है. छत्तीसगढ़ का बच्चा-बच्चा इस बात को जानता है कि प्रति बोतल 5 रुपए एक्स्ट्रा पैसे लिए जा रहे हैं. आज तक इस बात का जवाब तक नहीं दिया गया कि 5 रुपए एक्स्ट्रा कहां जाता है.

शराब दुकानों में कितने सीसीटीवी कैमरे लगे थे? वेयर हाउस में जितने सीसीटीवी कैमरे लगे थे उसको तो चालू कर दिया जाए. बियर की दुकानों को बंद करने से शराबबंदी नहीं होती. आपने महिलाओं को विश्वास दिलाया था. शराबबंदी करने का लेकिन, शराब बंद नहीं किया गया. छत्तीसगढ़ में लोकपाल अधिनियम लागू करने का वादा किया गया था इसमें क्या समस्या है? आखिर क्यों लोकपाल विधेयक लागू नहीं किया जा रहा है. इसमें तो कोई पैसा भी नहीं लगना है.

आउटसोर्सिंग को समाप्त करने की बात कही गई थी, कि आउटसोर्सिंग को बंद नहीं किया गया. संपत्ति कर को आधा करने की बात कही गई थी क्यों नहीं किया गया. पंचायती राज और नगरीय निकायों में निष्पक्षता से चुनाव की बात कही गई, कहाँ निष्पक्षता रही? पूरे प्रदेश में भय और दबाव का वातावरण रहा. सरकार को इस स्थिति को ठीक करने की आवश्यकता है.

शक्कर कारखाने में आठ 8 महीने तक पेमेंट नहीं हो रहा है. गन्ना किसान परेशान है. इसलिए गन्ना का उत्पादन कम हो रहा है. शक्कर कारखाने पर अड़चन आ रही है. पूरे प्रदेश के किसानों में निराशा है. बुनकरी का पूरा काम प्रदेश भर में ठप है. बुनकरों को राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है. एक तरफ तो हम गांधी जी को 150 वर्ष में याद कर रहे हैं, लेकिन हाथ करघा के उद्योग को दुरुस्त करने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है. जिसे गांधी जी ने प्रोत्साहित करने की बात कही.

हमने बीते 15 सालों में एक लाख किलोमीटर सड़क का निर्माण पीएमजीएसवाय और पीडबल्यूडी के माध्यम से किया था. आज इतनी बुरी स्थिति है कि एक भी सड़क के निर्माण का काम नहीं हो रहा है. यही स्थिति रही तो मध्यप्रदेश से भी बुरी स्थिति हो जाएगी.

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